Monday, April 25, 2016

नेह ह्रदय का घुलने दो...

ख्वाब कई पाले है मन में
नई नई आशा जीवन में
नेह ह्रदय का घुलने दो

हर मुश्किल टल जाएगी
हिम्मत भी बढ़ जाएगी
साथ में लेकर चलने दो

रिश्ते नाते प्रेम की बातें
खुशियों की हो बरसातें
जख्म दिलों के सिलने दो

हर दिन सुबह जुनून मिले
रात नींद में सुकून मिले
साँझ सुहानी ढलने दो

...अमित

Wednesday, April 13, 2016

कहते रहो सलाम मोहब्बत...

सुबह मोहब्बत-शाम मोहब्बत
रिश्तों का एक नाम मोहब्बत

समय तुम्हारे साथ नहीं जब
आएगी तब ये काम मोहब्बत

रोज-रोज की भाग-दौड़ में
जीवन का आराम मोहब्बत

द्वेष भुलाकर प्रीत कराती
खुशियों का पैगाम मोहब्बत

रोज लिखे कलाम मोहब्बत
कहते रहो सलाम मोहब्बत

...अमित

Saturday, April 9, 2016

अपने मन की प्यास बड़ी है...

अपने मन की प्यास बड़ी है
लेकिन उनकी आस बड़ी है
क्या दिखलाए अपनी खोली
कोठी उनके पास बड़ी है
दे दे कर थक गए आवेदन
लिस्ट पहले से खास बड़ी है
इम्तेहान कब होगा अपना
दुनियादारी की क्लास बड़ी है
ख़त्म नहीं होती ये मुश्किल
जिंदगी क्यों उदास बड़ी है
...अमित

खुशियां लिखकर तार करेंगे...

जीवन को आकार करेंगे
सुंदर सपने साकार करेंगे
दुनियादारी की गलियों में
संबंधों का व्यापार करेंगे
दूर देश अपनों को अबके
खुशियां लिखकर तार करेंगे
विपदाओं के इस दरिया को
हम सब मिलकर पार करेंगे
विपरीत हवाओं के आगे
हौंसलों को पतवार करेंगे
...अमित

तम को हम तारे सदा ऐसा दान दो माँ सरस्वती
चलते रहे सदा सत्य पथ ऐसा भान दो माँ सरस्वती
रखे ह्रदय में दया धरम सभी एक साथ बढ़े चले
रहे दीन किंतु दुखी नहीं ये सम्मान दो माँ सरस्वती 
...अमित

सतपुड़ा का आँचल...

हर वसंत में याद तुम्हारी साथ हमारे चलती है
दिल में अरमानों के साथ खुशियाँ लाखों पलती है

सतपुड़ा का ये आँचल नित नए गीत सुनाता है
टेसू के फूलों के संग सुंदरता रंग बदलती है

साथ राह में बहते झरने निर्मल-पावन लगते है
पेड़-पहाड़ों के काँधों से साँझ सुहानी ढलती है

दिन ढलने के साथ समय की मोहलत और बढ़ती है
महुवा फुले पेड़ों से मदमाती सांस मचलती है

सुंदर सरसो के खेतों में अम्बुवा मोर बौराते है
सतपुड़ा के अंचल में तन्हाई हाथ मलती है

...अमित