Wednesday, June 1, 2016

बहे ये अमृतमान...

कुंदा को निर्मल करे, मिलकर सब श्रमदान
कल-कल कर निर्मल बने, बहे ये अमृतमान


नवग्रह जिसके तीर पर, सुख का हो उद्भाव
एक ओर से हो अजान, सब में हो सद्भाव

सतपुड़ा से बह चली, होकर ये गतिमान
रेवा में जाकर मिले, सबका ये अभिमान

शहर साथ में हो चला, बदलेंगे हालात
सब मिलकर प्रयास करे, बन जायेगी बात

जीवनदायी ये सदा, सबका रखती ध्यान
कचरा इसमें डालकर, क्यों बनते अज्ञान

...अमित

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