Friday, May 1, 2015

मजदूर ही तो है हम...










मजदूर ही तो है हम
दूसरों के लिए चमक के आधार है हम
खुद से ही बेरूखी के शिकार है हम
मजदूर ही तो है हम
सुबह से देर रात तक दर-दर से दफ्तर तक 
धूप-छांव, सर्दी-बरसात, गर्मी का अहसास है हम
मजदूर ही तो है हम
अवकाश के नाम पर भी काम है हम
हां! खबरों की शक्ल में अखबार है हम
मजदूर ही तो है हम...

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