Wednesday, April 13, 2016

कहते रहो सलाम मोहब्बत...

सुबह मोहब्बत-शाम मोहब्बत
रिश्तों का एक नाम मोहब्बत

समय तुम्हारे साथ नहीं जब
आएगी तब ये काम मोहब्बत

रोज-रोज की भाग-दौड़ में
जीवन का आराम मोहब्बत

द्वेष भुलाकर प्रीत कराती
खुशियों का पैगाम मोहब्बत

रोज लिखे कलाम मोहब्बत
कहते रहो सलाम मोहब्बत

...अमित

3 comments:

  1. अमित जी बहुत ही खूबसूरत रचना है जब तक जिंदगी है प्यार को बाटते चले,बहुत ही सुंदर रचना है आप ऐसी ही रचनाओं को शब्दनगरी पर भी लिख सकते हैं वहां पर भी आँसू बयान करते हैं ज़स्बात, हँसी, से कहीं ज़्यादा जैसे लेख पढ़ व लिख सकते हैं. . . .. . . . .

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    1. शुक्रिया प्रतीक सर...

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    2. शुक्रिया प्रतीक सर...

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