Thursday, August 6, 2015

कोई वक्त के साथ बिछड़ता रहा...

वक्त नहीं मिला कभी मुझसेमैं हमेशा उसका इंतजार करता रहाबदलते रहे दिन महिने सालवो मृग मरीचिका सा छलता रहामिलते रहे हारकर तजुर्बें वक्त के साथफिर भी जीत की कामना करता रहाकोई साथ आया वक्त देखकरकोई वक्त के साथ बिछड़ता रहावक्त नहीं मिला कभी मुझसेमैं हमेशा उसका इंतजार करता रहा...अमित

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