बातों-बातों में वक्त गुजर ही गया
गम के आईनों से धूल हटाता कौन है
हर बार बेइंतहा चाहता रहा एक शख्स
यही जवाब न मिला की बेवफा कौन है
जो हुआ हर बार बस देखते ही रहे
मोड़ से गुजरकर पीछे देखता कौन है
मिटने लगे है तमाम लिखावटों के निशां
तुम्हारें नाम लिखे खतों को खोलता कौन है
तेरे एहसास की बारिश भिगोती रही हरदम
ठंडी पड़ गई आग को जलाता कौन है
हसरतों को पाने में डूबता रहा अमित
गलतफहमियों के दरियां से उभरता कौन है
....अमित
गम के आईनों से धूल हटाता कौन है
हर बार बेइंतहा चाहता रहा एक शख्स
यही जवाब न मिला की बेवफा कौन है
जो हुआ हर बार बस देखते ही रहे
मोड़ से गुजरकर पीछे देखता कौन है
मिटने लगे है तमाम लिखावटों के निशां
तुम्हारें नाम लिखे खतों को खोलता कौन है
तेरे एहसास की बारिश भिगोती रही हरदम
ठंडी पड़ गई आग को जलाता कौन है
हसरतों को पाने में डूबता रहा अमित
गलतफहमियों के दरियां से उभरता कौन है
....अमित
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