Sunday, November 27, 2016

जुगनुओं को देख उड़ने का हौसला भर ले
अंधेरों में ही सही तू लो की बातें कर ले

तपती रेत में बढ़ता चल पैरों छाले न देख
ऊँटों की तरह सेहरा से मुलाकातें कर ले

आसमान को देख आशाओं से जी भरके
चाँद सितारों के साथ ख़ुशी रातें कर ले

पतझड़ में पहाड़-नदियों की आस बंधने दे
सावन के साथ मिलकर बरसातें कर ले

जो नहीं मिला वो जरूर मिल जायेगा अमित
अभी जो है उन्ही के साथ सौगातें कर ले

...अमित

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