सुंदरता को देख तुम्हारी दर्पण का मन डोल रहा है
चंदन तरु पर विषधर अपना जैसे फन खोल रहा है
अभिलाषा लेकर मिलने की रात कट रही आँखों में
शब्द सलोने निकल रहे है हरदम उनकी बातों में
भोर के पहले बार बार क्यों दिल अपना टटोल रहा है
चंदन तरु पर विषधर अपना...
व्यस्तता ऐसी भी क्या एक बार भी मिलने आ न सको
साथ बैठकर कुछ पल तुम दो गीत प्रीत के गा न सको
मधुर प्रेम के रिश्तों को क्यों आडम्बर में तोल रहा है
चंदन तरु पर विषधर अपना...
चंदन तरु पर विषधर अपना जैसे फन खोल रहा है
अभिलाषा लेकर मिलने की रात कट रही आँखों में
शब्द सलोने निकल रहे है हरदम उनकी बातों में
भोर के पहले बार बार क्यों दिल अपना टटोल रहा है
चंदन तरु पर विषधर अपना...
व्यस्तता ऐसी भी क्या एक बार भी मिलने आ न सको
साथ बैठकर कुछ पल तुम दो गीत प्रीत के गा न सको
मधुर प्रेम के रिश्तों को क्यों आडम्बर में तोल रहा है
चंदन तरु पर विषधर अपना...
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