भार सपनों का रात भर सोने नहीं देता
उनींदी आँखों में सुबह होने नहीं देता
ख्वाब देखे थे जो वो नींद में ही टूट गए
सागर आँखों में है मगर रोने नहीं देता
निशां नजर नहीं आते कारवां को पता दे जो
वो आँधियों में भी घिर कर खोने नहीं देता
दाग कितने पैरहन में लिए फिरते है यहाँ सब
जेहन के दाग वो न जाने क्यों धोने नहीं देता
लाश जिंदगी की तैरती रहती है “अमित”
समंदर भी खुद के भीतर डुबोने नहीं देता
...अमित
उनींदी आँखों में सुबह होने नहीं देता
ख्वाब देखे थे जो वो नींद में ही टूट गए
सागर आँखों में है मगर रोने नहीं देता
निशां नजर नहीं आते कारवां को पता दे जो
वो आँधियों में भी घिर कर खोने नहीं देता
दाग कितने पैरहन में लिए फिरते है यहाँ सब
जेहन के दाग वो न जाने क्यों धोने नहीं देता
लाश जिंदगी की तैरती रहती है “अमित”
समंदर भी खुद के भीतर डुबोने नहीं देता
...अमित
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