उम्मीदों की न बारिश होगी, खेत न अबके लहराएंगे
डूब जाएगा घर आँगन सब जलराशि में बह जाएंगे
डूबेगा हर गली मोहल्ला, जिसमें बीता था बचपन
छत बचेगी और न ताखा, जिसमें रखते थे दरपन
बरगद पर सावन के झूले अबके नहीं नजर आएंगे
डूब जाएगा घर आँगन सब...
चौपालें सूनी सी होगी, नहीं दिखाई देंगे मेले
हँसी ठिठोली जहां होती थीे, बच्चों के खो गए रेले
पेड़ की छांव वाले आँगन में अबके, लोरी कैसे सुनाएंगे
डूब जाएगा घर आँगन सब...
खुशियां लेकर जन्मी बिटिया, परणी जब आंखें भर आई
जिस आँगन में मंडप बांधा, दरवाजे पर बजी शहनाई
ब्याही बेटी के जैसे, घर वापस लौट न पाएंगे
डूब जाएगा घर आँगन सब...
डूब जाएगा घर आँगन सब जलराशि में बह जाएंगे
डूबेगा हर गली मोहल्ला, जिसमें बीता था बचपन
छत बचेगी और न ताखा, जिसमें रखते थे दरपन
बरगद पर सावन के झूले अबके नहीं नजर आएंगे
डूब जाएगा घर आँगन सब...
चौपालें सूनी सी होगी, नहीं दिखाई देंगे मेले
हँसी ठिठोली जहां होती थीे, बच्चों के खो गए रेले
पेड़ की छांव वाले आँगन में अबके, लोरी कैसे सुनाएंगे
डूब जाएगा घर आँगन सब...
खुशियां लेकर जन्मी बिटिया, परणी जब आंखें भर आई
जिस आँगन में मंडप बांधा, दरवाजे पर बजी शहनाई
ब्याही बेटी के जैसे, घर वापस लौट न पाएंगे
डूब जाएगा घर आँगन सब...
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