सारे तारे ओझल हो साथ छोड़ने लगे
ये अँधेरे उजाला देख मुँह मोड़ने लगे
साथ साथ चलती रही खुशबू फूलों की
फिर लोग क्यों डालियों को तोड़ने लगे
पतझड़ में छोड़ निकले थे जो आशिया
बसंत में पंछी फिर तिनके जोड़ने लगे
...अमित
ये अँधेरे उजाला देख मुँह मोड़ने लगे
साथ साथ चलती रही खुशबू फूलों की
फिर लोग क्यों डालियों को तोड़ने लगे
पतझड़ में छोड़ निकले थे जो आशिया
बसंत में पंछी फिर तिनके जोड़ने लगे
...अमित
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