Thursday, January 14, 2016

सब कुछ मिले नए साल में...

नए साल की शुरुआत में...

गुजर गए काफिले गए साल में
अब सब कुछ मिले नए साल में

रौनकें उजड़ गई जहां अरसे से
खुशियों के गुल खिले नए साल में

टूटकर बिखरकर जो हुए जार जार
जज़्बातों से रिश्ते सिले नए साल में

खंडहरों में बदलकर न हुए आबाद
विचारों से सजे वो किले नए साल में

अस्तित्व अपना बनाने में लग चुके
इस बार बनेंगे वो जिले नए साल में

...अमित

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